फर्जी ट्रांसफर ऑर्डर कांड में BJP नेताओं पर FIR; पार्टी ने दो पदाधिकारियों को पद से हटाया, चर्चा में नेताओं के साथ तस्वीरें

रायपुर, 22 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ में फर्जी ट्रांसफर ऑर्डर के मामले ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। कथित तौर पर फर्जी स्थानांतरण आदेश तैयार कर उसे सरकारी कार्यालय में असली बताकर पेश करने के मामले में पुलिस ने भाजपा नेताओं समेत आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज की है। कार्रवाई के बाद भाजपा ने भी अपने दो पदाधिकारियों को उनके दायित्वों से मुक्त कर दिया है।
मामले में भाजपा नेता कृष्णा अवस्थी का नाम सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। सोशल मीडिया पर उनके प्रोफाइल में कई बड़े भाजपा नेताओं के साथ तस्वीरें दिखाई देती हैं। इनमें सांसद, पूर्व मंत्री और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ उनकी तस्वीरें शामिल हैं। भाजपा ने अवस्थी को जिला महामंत्री की जिम्मेदारी भी दी थी।
पलारी पुलिस ने मामले में करण देवांगन व अन्य के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 336(3), 337, 338, 340(2) और 3(5) के तहत अपराध दर्ज किया है. पुलिस अब कथित फर्जी आदेश तैयार करने, उसमें शामिल अन्य लोगों और दस्तावेज के इस्तेमाल से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है.
पुलिस ने इस मामले में भाजपा के जिला महामंत्री कृष्णा अवस्थी, जिला उपाध्यक्ष पुनिराम पटेल, रवि कुमार सेन और करण कुमार देवांगन पर अपराध दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया है.
ग्रामीण चिकित्सा सहायक के ट्रांसफर का फर्जी आदेश
मामला बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के पलारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से जुड़ा है। पुलिस के मुताबिक, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रोहांसी में पदस्थ ग्रामीण चिकित्सा सहायक करण कुमार देवांगन ने अपने स्थानांतरण और कार्यमुक्त किए जाने से संबंधित एक आदेश प्रस्तुत किया था।
इस आदेश में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, बलौदाबाजार-भाटापारा कार्यालय का आदेश क्रमांक एनएचएम/एचआर/2026-27/1359, दिनांक 14 अगस्त 2026 दर्ज था। कथित आदेश में करण देवांगन को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रोहांसी से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मोपर, विकासखंड भाटापारा स्थानांतरित किए जाने का उल्लेख था।
जांच में खुला फर्जीवाड़ा
जब स्वास्थ्य विभाग ने आदेश की जांच कराई तो सामने आया कि मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय से ऐसा कोई आदेश जारी ही नहीं किया गया था। आदेश पर किए गए हस्ताक्षर को भी संबंधित अधिकारी ने अपना हस्ताक्षर मानने से इनकार कर दिया।
इसके बाद मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने 17 अगस्त को खंड चिकित्सा अधिकारी, पलारी को पत्र जारी कर मामले में तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।
स्वास्थ्य विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि करण कुमार देवांगन का पद राज्य संवर्ग का है और उसके स्थानांतरण का अधिकार राज्य शासन के पास है। इसके अलावा वर्तमान में स्थानांतरण पर प्रतिबंध भी लागू है।
फर्जी दस्तावेज और सरकारी अधिकारी के फर्जी हस्ताक्षर का आरोप
पुलिस ने खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. पंकज वर्मा के बयान, आवेदन और प्रस्तुत दस्तावेजों की जांच की। प्रारंभिक जांच में सरकारी अधिकारी के कथित फर्जी हस्ताक्षर कर कूटरचित दस्तावेज तैयार करने और उसे वास्तविक सरकारी आदेश बताकर कार्यालय में प्रस्तुत करने की बात सामने आई।
इसके आधार पर पलारी पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत करण कुमार देवांगन और अन्य आरोपियों के खिलाफ अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।





FIR के बाद BJP की भी कार्रवाई
फर्जी ट्रांसफर ऑर्डर मामले में पुलिस कार्रवाई के बाद भाजपा ने भी संगठनात्मक स्तर पर कदम उठाया है। पार्टी ने दो पदाधिकारियों को उनके दायित्वों से मुक्त कर दिया है। इनमें भाजपा नेता कृष्णा अवस्थी का नाम भी चर्चा में है।
अवस्थी की सोशल मीडिया गतिविधियों को लेकर भी अब सवाल उठ रहे हैं। उनके फेसबुक प्रोफाइल पर भाजपा के कई बड़े नेताओं के साथ तस्वीरें पोस्ट की गई हैं। इनमें सांसदों, पूर्व मंत्रियों और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ उनकी मुलाकातों की तस्वीरें शामिल हैं।
हालांकि, किसी वरिष्ठ भाजपा नेता के साथ तस्वीर होना अपने आप में किसी अपराध में संलिप्तता का प्रमाण नहीं है। मामले में पुलिस की जांच से ही यह स्पष्ट होगा कि फर्जी आदेश तैयार करने और उसे सरकारी कार्यालय में प्रस्तुत करने की पूरी प्रक्रिया में किस-किस की भूमिका थी।
पुलिस ने मामले की विवेचना शुरू कर दी है और दस्तावेजों के साथ-साथ मामले से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
